भिटरिया की चाट
भिटरिया की चाट!
लखनऊ से बस्ती तक की यात्रा हो या बस्ती गोरखपुर से लखनऊ आना हो।
अवध बस स्टैंड से गोरखपुर बस्ती जाने वाली सरकारी बस पर बैठिए। एक समय था कि लोग अपने साथ उपन्यास या पत्रिका लेकर चलते थे और राह भर उसी में खोए रहते थे।
अब तो मोबाइल, पावर बैंक और ईयर पॉड रखकर चलना जरुरी है।
सीट खिड़की की मिल जाय तो फिर यात्रा के आनंद का क्या ही कहना है!
बैग को उपर रैक में सहेजा, पानी की बोतल, मोबाइल के सहयोगियों को निकाला और यात्रा शुरू हो गई।
मोबाइल पर कोई सीरीज या मूवी लगा लिया और आराम से बस की पिछली सीट से सर टिका कर अपने आप में व्यस्त हो गए। कौन सहयात्री बगल में बैठा है उससे कोई मतलब नही है।
यात्रा के आनंद में विघ्न सिर्फ कंडक्टर महोदय ही डालते हैं। अपने गंतव्य स्थल के बारे में जानकारी देकर पैसे निकाले और टिकट लिया काम खत्म हुआ परंतु यदि आपके दुर्भाग्य से कंडक्टर महोदय ने बाकी बचे पैसे बाद में लेने के लिए कह दिया तो समझ लीजिए आपकी यात्रा बेसुकुन हुई क्योंकि सारा ध्यान बाकी बचे पैसे लेने में लगा रहेगा।
आधा रास्ता तय करने के बाद भिटरिया नामक की जगह पर बस रुकेगी क्योंकि वहां आप हल्के और भारी हो सकते हैं। वहां आपके पेट के लिए, जीभ की जरूरत का ध्यान रखकर लगभग सारी व्यवस्था मिलेगी।
भिटरिया की मैं कुछ और तो नहीं खोमचा जरूर खाना पसंद करती हूं।
भिटरिया ऐसा पड़ाव है जहां आपको लखनऊ आते, जाते दोनो समय रुकना ही है।
आप खाने के शौकीन हैं तो पेट भर लिजिए, चटपटा खाना है तो आलू टिक्की, खोमचा खाइए, हाइजीन वाले हैं तो बन्द पैकेट चिप्स और पानी बोतल ले लिजिए।
घुटी हुई मटर उबले आलू का गाढ़ा झोल करारी टिक्की कुटे मसाले जो लगभग सभी जगह एक जैसे ही होते है और दही के साथ तालमेल सही बिठाते हैं।
पलाश के पत्तों के दोने में सजाकर जब ये चाट सामने आती है तो इसका रंग रूप और सुगन्ध मिलकर जीभ के सपोर्ट में दिमाग के खिलाफ विद्रोह कर बैठते हैं।
आप स्वास्थ्य के प्रति यदि सचेत हैं तो रहने दीजिए आपको पसंद नहीं आयेगा लेकिन फिर भी कुछ ले जरूर लिजिए क्योंकि इसके बाद बस और कही रुकेगी नही फिर आपको असुविधा का सामना करना पड़ेगा।



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