सनई
#सनई
👇 सनई दरअसल पटसन प्रजाति का पौधा होता है जिसमें यह पीले पीले फूल होते हैं इस फूल के लिए ही हमारे छेत्र में इसे खेतों के किनारे किनारे लगाया जाता है इसका पौधा अरहर के पौधे जैसा होता है जिसमें यह फूल आते हैं इन फूलों के बेहद स्वादिष्ट पकोड़े बनते है जो मुझे बहुत पसंद है आप ने भी सनई फूलों के पकोड़े खाएं अवश्य होगें ??
👇इन फूलों को साग के रूप में खूब इस्तेमाल किया जाता है जो काफी स्वादिष्ट होता है। अप्रैल मई में इनकी बुवाई ग्रामीण क्षेत्रों में हो जाती है और अगस्त से इनकी कलियों की शुरुआत होकर सितम्बर, अक्टूबर, नवम्बर भर तक सनई के फूल ग्रामीण इलाकों के बाजारों की रौनक बढ़ाते रहते है।
लेकिन शहरों में यह उपलब्ध हो पाते है पता नहीं ??
यदि आपको यह बाजारों में बिकते दिखाई पड़े तो इन्हें जरूर खरीद लीजिए क्योंकि कुछ सब्जियां सीजन भर ही मिलती है लेकिन इनका स्वाद अदभुद होता है।
👇इनका सादा साग और कच्चे मसाले के साथ भी सनई साग बनाया जाता है हमारे यहां इसे हरी मिर्च लहसुन के साथ बनाया जाता है जो काफी तीखा और मजेदार होता है इसे आप चावल और रोटी दोनों के साथ मज़े से खा सकते हैं।
👇इसकी खेती व्यावसायिक रूप से नहीं होती है बल्कि किसान इसे शौकिया तौर पर लगाते हैं अगर इसकी खेती व्यावसायिक तौर पर हो तो किसानों को ज्यादा फायदा हो सकता है पर इसकी खेती सब्जी के खेती के साथ ही जब खेतों में भिंडी, नेनुआ, कद्दू लगाया जाता है तो किनारे किनारे धारी के रूप में इसे लगा दिया जाता है। एक तरह से यह खेतों का रखवाला भी होता है इसके पौधे एक के बाद एक इतने नजदीक नजदीक होते हैं कि सब्जी के खेतों को बर्बाद करने वाले पशुओं को भी रोकने में मदद मिलती है।
👇अप्रैल के अंतिम सप्ताह से इसमें फूल आना शुरू हो जाता है। बड़े शहरों में यह मिलता है या नहीं पर ग्रामीण बाजारों में यह आपको 140 रूपये किलो आसानी से मिल जाता है। बाद में इसके फूल फल बन जाते हैं जिसमे बीज होता है यह एक गोल खाली नंबर डिब्बे की तरह होता है। कई इलाकों में फूल समाप्त होने के बाद इसे पानी में पटसन की तरह रखकर रेशे निकाले जाते हैं।
पनीर कुल्चा




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